श्री गणेश बाग मंदिर ग्वालियर

धर्मो वै सत्यं
भारत को यदि कोई “अक्षुण्ण और जीवित सभ्यता” बनाकर आज तक खड़ा रखे हुए है, तो उसका आधार केवल “धर्म” है। धर्म वह है जो हमें “मानव” बनाता है। गालव ऋषि की तपोभूमि ग्वालियर शहर, कई एतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को समेटे है। ग्वालियर का प्राचीनतम गणेशबाग मंदिर, 250 वर्ष पूर्व 1840 ई में स्थापित गणेश मंदिर है। मंदिर में स्थित गणेश प्रतिमा मनमोहक है, जिसके दर्शनमात्र से ही भक्तिभाव जागृत हो जाता है। चार भुजाधारी, पीला पीतांबर धारण किए, ऋद्धि एवं सिद्धि के साथ श्री महागणेश विराजे हैं। हाथों में सुंदर पुष्प, सुंदर मुकुट एवं मूषक पर विराजे प्रभु की छवि अत्यंत मनमोहक है। मंदिर के प्रांगण में एक नवग्रह मंदिर एवं हनुमान मंदिर भी स्थापित है। ।

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गणेश बाग मंदिर का पुनर्निर्माण

भारतीय संस्कृति के इतिहास में मंदिर केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं रहे, बल्कि वे समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के जीवन-केंद्र रहे हैं। मंदिरों ने हजारों वर्षों तक भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक चेतना को जीवित रखा।

“मंदिर भारतीय संस्कृति का सबसे जीवंत स्मारक है, जिसने विदेशी आक्रमणों, राजनीतिक उथल-पुथल और सामाजिक संकटों के बावजूद समाज की आत्मा को जीवित रखा।”

वर्तमान परिपेक्ष्य में, ग्वालियर की धरा पर गणेश बाग मंदिर का पुनर्निर्माण का संकल्प, सज्जन शक्ति द्वारा इसे धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के साथ, समाज, संस्कृति, कला, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के केंद्र के रूप में करना तय कि या हैं।

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आरती

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची ।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची ।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ॥१॥
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ती हो श्री मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ।। धृ० ।।
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा ।।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा ।
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || जय०॥२॥
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।
सरळ सोड वक्रतुंड त्रिनयना ।
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना || ३||
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ती हो श्री मंगलमूर्ती ।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ।।

गणेश स्त्रोत

प्रणम्यं शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुः कामार्थसिद्धये ।। 1 ।।
प्रथमं वक्रतुडं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।। 2 ।।
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ।। 3 ।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।। 4 ।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभुः ।। 5 ।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ।। 6 ।।
जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् । संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ।। 7 ।।
अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् । तत्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ।। 8 ।।F ।। इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
श्री गणेशस्तोत्रं का दिन में तीन बार पाठ करने से समस्त संकट दूर होकर सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।
एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ।।
जय गणेश.......
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा ।।
जय गणेश.........
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
जय गणेश.........
सूर श्याम शरण आए, सफल करो सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ।।
दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी ।।
जय गणेश.........

मंदिर परिकल्पना

आओ ! बनायें गणेश जी का मंदिर

हम सबके श्री गणेश जी, नवग्रह जी एवं हनुमान जी का मंदिर बनने जा रहा है। हमें ही बनाना है। बढ़ा बने, अच्छा बने, सर्वसुविधायुक्त बने, दर्शनीय बने तो हम सब अपना-अपना योगदान निश्चित करें, स्वप्रेरित हो श्रद्धा से करें। समर्पण नगद/चैक/ड्राफ्ट/NEFT/RTGS/QR Code किसी भी माध्यम से किया जा सकता है। गणेश बाग मंदिर के बैंक का विवरण एवं QR Code निम्नानुसार हैं:

शिला पूजन यज्ञ

यज्ञ में जैसे सभी आहुति देते हैं, वैसे ही हम सब शिला पूजन कर, मंदिर निर्माण में अपना हाथ बटायेंगे। शिला पूजन यज्ञ प्रति रविवार को प्रातः 9 बजे प्रथम पाली एवं 10 बजे द्वितीय पाली को निर्धारित है। पूजन के लिए सपरिवार भारतीय भेषभूषा में समय से 10 मिनिट पूर्व उपस्थित होने का आग्रह है। आप दी गई लिंक/क्यूआर पर आप शिला पूजन हेतु आरक्षण कर सकते हैं।

प्रस्तावित दिव्य, भव्य धार्मिक केंद्र के निर्माण में अनुमानित व्यय 10 करोड़ संभावित है, जिसे समाज के सक्रिय सहयोग से संभव बनाना होगा

आप सहयोगी बन सकते है

परिसर योजना

भव्य, दिव्य और दर्शनीय मंदिर परिसर

जहां प्रथम पूज्य श्री गणेश, श्री हनुमान और श्री नवग्रह मंदिर स्थापित होगा

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वेद विद्यालय

वेद विद्यालय जहाँ वेदों का अध्ययन, पाठन, व्याख्या और जीवन में अनुप्रयोग किया जाता है। वेद, भारतीय सभ्यता के प्राचीनतम और सार्वभौमिक

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संस्कृत शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र

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संपर्क सूचना

  • पता : गणेश बाग मंदिर रामाजी का पुरा, ए.बी. रोड, ग्वालियर

  • संपर्क सूत्र :
    श्री हेमंत जी गर्ग - 7987318996
    श्री जगदीश जी श्रीवास 76979948771

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